उद्यल्लाङ्गूलघर्षप्रचलजलनिधिं भीमरूपं कपीन्द्रं ध्यायन्तं रामचन्द्रं प्लवगपरिवृढं सत्त्वसारं प्रसन्नम् ॥ इति मानसोपचारैः संपूज्य, ॐ नमो भगवते दावानलकालाग्निहनुमते [ जयश्रियो जयजीविताय ] धवलीकृतजगत्त्रय वज्रदेह वज्रपुच्छ वज्रकाय वज्रतुण्ड वज्रमुख वज्रनख वज्रबाहो वज्ररोम वज्रनेत्र वज्रदन्त वज्रशरीर सकलात्मकाय भीमकर पिङ्गलाक्ष उग्र प्रलयकालरौद्र वीरभद्रावतार शरभसालुवभैरवदोर्दण्ड लङ्कापुरीदाहन उदधिलङ्घन दशग्रीवकृतान्त सीताविश्वास इर्श्वरपुत्र अञ्जनागर्भसंभूत उदयभास्करबिम्बानलग्रासक देवदानवऋषिमुनिवन्द्य पाशुपतास्त्रब्रह्मास्त्रबैलवास्त्रनारायणास्त्रकालशक्तिकास्त्रदण्डकास्त्रपाशाघोरास्त्रनिवारण पाशुपतास्त्रब्रह्मास्त्रबैलवास्त्रनारायणास्त्रमृड सर्वशक्तिग्रसन ममात्मरक्षाकर परविद्यानिवारण आत्मविद्यासंरक्षक अग्निदीप्त अथर्वणवेदसिद्धस्थिरकालाग्निनिराहारक वायुवेग मनोवेग श्रीरामतारकपरब्रह्मविश्वरूपदर्शन लक्ष्मणप्राणप्रतिष्ठानन्दकर स्थलजलाग्निमर्मभेदिन् सर्वशत्रून् छिन्धि छिन्धि मम वैरिणः खादय खादय मम संजीवनपर्वतोत्पाटन डाकिनीविध्वंसन सुग्रीवसख्यकरण निष्कलङ्क कुमारब्रह्मचारिन् दिगम्बर सर्वपाप सर्वग्रह कुमारग्रह सर्वे छेदय छेदय भेदय भेदय भिन्धि भिन्धि खादय खादय टङ्क टङ्क ताडय ताडय मारय मारय शोषय शोषय ज्वालय ज्वालय हारय हास्य देवदत्तं नाशय नाशय अतिशोषय अतिशोषय मम सर्वं च हनुमन् रक्ष रक्ष ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं हुं फट् घे स्वाहा ॥